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mahabharat 5.82.40: तेरह साल हो गए हैं जब से मैं इंतज़ार कर रहा हूँ, मेरे दिल में एक तीव्र क्रोध है, एक धधकती आग की तरह।   |   mahabharat अध्याय 5.82: द्रौपदीका श्रीकृष्णसे अपना दु:ख सुनाना और श्रीकृष्णका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 82: द्रौपदीका श्रीकृष्णसे अपना दु:ख सुनाना और श्रीकृष्णका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  5.82.40 
त्रयोदश हि वर्षाणि प्रतीक्षन्त्या गतानि मे।
विधाय हृदये मन्युं प्रदीप्तमिव पावकम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
तेरह साल हो गए हैं जब से मैं इंतज़ार कर रहा हूँ, मेरे दिल में एक तीव्र क्रोध है, एक धधकती आग की तरह।
 
It has been thirteen years since I have been waiting, with this intense anger in my heart, like a blazing fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)