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mahabharat 5.82.36: कमल-नेत्र श्रीकृष्ण! तुम जो भी करो या अपने शत्रुओं से शांति स्थापित करने का प्रयास करो, दु:शासन द्वारा उखाड़े गए इन बालों को याद रखना।   |   mahabharat अध्याय 5.82: द्रौपदीका श्रीकृष्णसे अपना दु:ख सुनाना और श्रीकृष्णका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 82: द्रौपदीका श्रीकृष्णसे अपना दु:ख सुनाना और श्रीकृष्णका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  5.82.36 
अयं ते पुण्डरीकाक्ष दु:शासनकरोद्‍धृत:।
स्मर्तव्य: सर्वकार्येषु परेषां संधिमिच्छता॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
कमल-नेत्र श्रीकृष्ण! तुम जो भी करो या अपने शत्रुओं से शांति स्थापित करने का प्रयास करो, दु:शासन द्वारा उखाड़े गए इन बालों को याद रखना।
 
Lotus-eyed Sri Krishna! Whatever you do or try to make peace with your enemies, remember these hairs pulled out by Dushasan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)