श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 82: द्रौपदीका श्रीकृष्णसे अपना दु:ख सुनाना और श्रीकृष्णका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  5.82.32 
यदि तेऽहमनुग्राह्या यदि तेऽस्ति कृपा मयि।
धार्तराष्ट्रेषु वै कोप: सर्व: कृष्ण विधीयताम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! यदि मैं आपकी कृपा का पात्र हूँ, यदि आप मुझ पर दया करते हैं, तो कृपया धृतराष्ट्र के पुत्रों पर अपना पूर्ण क्रोध प्रकट कीजिए॥32॥
 
Shri Krishna! If I am the recipient of your grace, if you have mercy on me, then please show your anger completely on the sons of Dhritarashtra. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)