श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 82: द्रौपदीका श्रीकृष्णसे अपना दु:ख सुनाना और श्रीकृष्णका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  5.82.30 
नन्वहं कृष्ण भीष्मस्य धृतराष्ट्रस्य चोभयो:।
स्नुषा भवामि धर्मेण साहं दासीकृता बलात्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! धर्म से मैं भीष्म और धृतराष्ट्र दोनों की पुत्रवधू हूँ, फिर भी उनके सामने मुझे बलपूर्वक दासी बनाया गया।
 
Shri Krishna! By religion I am the daughter-in-law of both Bhishma and Dhritarashtra, yet in their presence I was forcibly made a maid.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)