श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 82: द्रौपदीका श्रीकृष्णसे अपना दु:ख सुनाना और श्रीकृष्णका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.82.19 
यथा त्वां न स्पृशेदेष दोष: कृष्ण तथा कुरु।
पाण्डवै: सह दाशार्है: सृंजयैश्च ससैनिकै:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! आपको सृंजय, पाण्डव और यादव सैनिकों सहित ऐसा प्रयत्न करना चाहिए कि यह दोष आपको स्पर्श न करे॥19॥
 
Sri Krishna! You should make such an effort with the Srinjayas, Pandavas and Yadavas along with the soldiers, that this fault does not touch you.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)