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mahabharat 5.82.17: पिताश्री! यह नियम केवल ब्राह्मणों को छोड़कर अन्य जातियों पर ही लागू होता है। यदि ब्राह्मण समस्त पापों में लिप्त भी हो, तो भी उसे मृत्युदंड नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि ब्राह्मण समस्त जातियों का गुरु है और दान में दी गई वस्तुओं का प्रथम उपभोक्ता है, अर्थात् वह प्रथम प्राप्तकर्ता है॥17॥   |   mahabharat अध्याय 5.82: द्रौपदीका श्रीकृष्णसे अपना दु:ख सुनाना और श्रीकृष्णका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 82: द्रौपदीका श्रीकृष्णसे अपना दु:ख सुनाना और श्रीकृष्णका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.82.17 
अन्यत्र ब्राह्मणात् तात सर्वपापेष्ववस्थितात्।
गुरुर्हि सर्ववर्णानां ब्राह्मण: प्रसृताग्रभुक्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
पिताश्री! यह नियम केवल ब्राह्मणों को छोड़कर अन्य जातियों पर ही लागू होता है। यदि ब्राह्मण समस्त पापों में लिप्त भी हो, तो भी उसे मृत्युदंड नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि ब्राह्मण समस्त जातियों का गुरु है और दान में दी गई वस्तुओं का प्रथम उपभोक्ता है, अर्थात् वह प्रथम प्राप्तकर्ता है॥17॥
 
Father! This rule applies to other castes only except Brahmins. Even if a Brahmin is immersed in all sins, he should not be given death penalty because Brahmin is the teacher of all castes and the first consumer of things given in charity, i.e. he is the first recipient.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)