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mahabharat 5.82.13: श्री कृष्ण! जो मनुष्य अपने प्राणों की रक्षा करता है, उसे उन शत्रुओं पर दण्ड का प्रयोग करना चाहिए, जो प्रेम और दान से शांत नहीं होते॥13॥   |   mahabharat अध्याय 5.82: द्रौपदीका श्रीकृष्णसे अपना दु:ख सुनाना और श्रीकृष्णका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 82: द्रौपदीका श्रीकृष्णसे अपना दु:ख सुनाना और श्रीकृष्णका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.82.13 
साम्ना दानेन वा कृष्ण ये न शाम्यन्ति शत्रव:।
योक्तव्यस्तेषु दण्ड: स्याज्जीवितं परिरक्षता॥ १३॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! जो मनुष्य अपने प्राणों की रक्षा करता है, उसे उन शत्रुओं पर दण्ड का प्रयोग करना चाहिए, जो प्रेम और दान से शांत नहीं होते॥13॥
 
Sri Krishna! A man who protects his life should use punishment on those enemies who are not pacified by love and charity. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)