युद्ध करने की इच्छा रखने वाले उन सभी वीर पुरुषों ने सात्यकि को ऋषि और मुनि कहकर उनकी बहुत प्रशंसा की और उनके वचनों की बहुत प्रशंसा की॥9॥
All those brave men who wanted to fight, praising Satyaki greatly by calling him a sage and a sage, greatly praised his words. 9॥
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि सहदेवसात्यकिवाक्ये एकाशीतितमोऽध्याय:॥ ८१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें सहदेव-सात्यकिवाक्यविषयक इक्यासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८१॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥