श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 81: युद्धके लिये सहदेव तथा सात्यकिकी सम्मति और समस्त योद्धाओंका समर्थन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.81.6 
न जानासि यथा दृष्ट्वा चीराजिनधरान् वने।
तवापि मन्युरुद्‍भूतो दु:खितान् प्रेक्ष्य पाण्डवान्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
क्या आप भूल गए हैं कि जब आपने पांडवों को जंगल में कष्ट भोगते, छाल और मृगचर्म धारण करते देखा था, तब आप भी क्रोध से भर गए थे?
 
Have you forgotten that you too were filled with anger when you saw the Pandavas suffering in the forest, wearing bark and deerskin?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)