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mahabharat 5.81.4: श्री कृष्ण! यदि भीमसेन, अर्जुन और धर्मराज युधिष्ठिर धर्म के मार्ग पर चलें, तो मैं उस धर्म को त्यागकर युद्धभूमि में दुर्योधन के साथ युद्ध करना चाहता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 5.81: युद्धके लिये सहदेव तथा सात्यकिकी सम्मति और समस्त योद्धाओंका समर्थन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 81: युद्धके लिये सहदेव तथा सात्यकिकी सम्मति और समस्त योद्धाओंका समर्थन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.81.4 
यदि भीमार्जुनौ कृष्ण धर्मराजश्च धार्मिक:।
धर्ममुत्सृज्य तेनाहं योद्‍धुमिच्छामि संयुगे॥ ४॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! यदि भीमसेन, अर्जुन और धर्मराज युधिष्ठिर धर्म के मार्ग पर चलें, तो मैं उस धर्म को त्यागकर युद्धभूमि में दुर्योधन के साथ युद्ध करना चाहता हूँ।
 
Shri Krishna! If Bhimasena, Arjun and Dharmaraja Yudhishthira follow the path of Dharma, then I want to abandon that Dharma and fight with Duryodhan on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)