Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.80.7: श्री कृष्ण! जब हम वन में रहते थे, तब हमारे विचार कुछ और थे, वनवास के समय वे कुछ और हो गए और उस अवधि को पूरा करने के बाद, जब हम सबके सामने प्रकट हुए, तब भी हमारे विचार कुछ और हो गए हैं॥7॥ | mahabharat अध्याय 5.80: नकुलका निवेदन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अन्यथा बुद्धयो ह्यासन्नस्मासु वनवासिषु।
अदृश्येष्वन्यथा कृष्ण दृश्येषु पुनरन्यथा॥ ७॥
अनुवाद
श्री कृष्ण! जब हम वन में रहते थे, तब हमारे विचार कुछ और थे, वनवास के समय वे कुछ और हो गए और उस अवधि को पूरा करने के बाद, जब हम सबके सामने प्रकट हुए, तब भी हमारे विचार कुछ और हो गए हैं॥7॥
Shri Krishna! When we lived in the forest, our thoughts were different, during our exile they changed to something else and after completing that period, when we appeared before everyone, our thoughts have changed to something else. ॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥