श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 80: नकुलका निवेदन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.80.10 
इमान् हि पुरुषव्याघ्रानचिन्त्यबलपौरुषान्।
आत्तशस्त्रान् रणे दृष्ट्वा न व्यथेदिह क: पुमान्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
यहाँ जो वीर पुरुष उपस्थित हैं, उनका बल और पराक्रम अतुलनीय है। उन्हें युद्धभूमि में अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित देखकर किसका हृदय भय से भर नहीं जाएगा?॥10॥
 
The brave men present here, their strength and valour are incomparable. Whose heart will not be filled with fear on seeing them equipped with weapons on the battlefield?॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)