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mahabharat 5.8.54: हे भरतवंशी राजा! ऐसा सुना जाता है कि महान देवराज इन्द्र ने भी अपनी पत्नी सहित महान दुःख भोगा था॥54॥   |   mahabharat अध्याय 5.8: शल्यका दुर्योधनके सत्कारसे प्रसन्न हो उसे वर देना और युधिष्ठिरसे मिलकर उन्हें आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 8: शल्यका दुर्योधनके सत्कारसे प्रसन्न हो उसे वर देना और युधिष्ठिरसे मिलकर उन्हें आश्वासन देना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  5.8.54 
इन्द्रेण श्रूयते राजन् सभार्येण महात्मना।
अनुभूतं महद् दु:खं देवराजेन भारत॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
हे भरतवंशी राजा! ऐसा सुना जाता है कि महान देवराज इन्द्र ने भी अपनी पत्नी सहित महान दुःख भोगा था॥54॥
 
Bharatvanshi king! It is heard that the great Devraj Indra along with his wife also suffered great sorrow. 54॥
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि सेनोद्योगपर्वणि शल्यवाक्ये अष्टमोऽध्याय:॥ ८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत सेनोद्योगपर्वमें शल्यवाक्यविषयक आठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)