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श्लोक  5.8.34 
राजर्षीणां पुराणानां मार्गमन्विच्छ भारत।
दाने तपसि सत्ये च भव तात युधिष्ठिर॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! प्राचीन राजाओं के मार्ग का अनुसरण करो। हे युधिष्ठिर! सदैव दान, तप और सत्य में लगे रहो। 34.
 
Bharat! Follow the path of the ancient kings. O dear Yudhishthira! Always remain engaged in charity, austerity and truth. 34.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)