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mahabharat 5.8.32: हे शत्रुओं को कष्ट देने वाले राजा! दुर्योधन द्वारा दिए गए इस महान दुःख के अंत में अब आप अपने शत्रुओं को मारकर सुख प्राप्त करेंगे॥32॥   |   mahabharat अध्याय 5.8: शल्यका दुर्योधनके सत्कारसे प्रसन्न हो उसे वर देना और युधिष्ठिरसे मिलकर उन्हें आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.8.32 
दु:खस्यैतस्य महतो धार्तराष्ट्रकृतस्य वै।
अवाप्स्यसि सुखं राजन् हत्वा शत्रून् परंतप॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं को कष्ट देने वाले राजा! दुर्योधन द्वारा दिए गए इस महान दुःख के अंत में अब आप अपने शत्रुओं को मारकर सुख प्राप्त करेंगे॥32॥
 
The king who torments his enemies! At the end of this great sorrow given by Duryodhana, you will now attain happiness by killing your enemies. 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)