Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.8.23: शल्य बोले, "हे राजन! आपका कल्याण हो। आप अपने नगर को जाएँ। मैं शीघ्र ही लौटूँगा।" यह कहकर राजा शल्य और दुर्योधन ने एक-दूसरे को गले लगाया और चले गए।   |   mahabharat अध्याय 5.8: शल्यका दुर्योधनके सत्कारसे प्रसन्न हो उसे वर देना और युधिष्ठिरसे मिलकर उन्हें आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 8: शल्यका दुर्योधनके सत्कारसे प्रसन्न हो उसे वर देना और युधिष्ठिरसे मिलकर उन्हें आश्वासन देना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.8.23 
शल्य उवाच
क्षिप्रमेष्यामि भद्रं ते गच्छस्व स्वपुरं नृप।
परिष्वज्य तथान्योन्यं शल्यदुर्योधनावुभौ॥ २३॥
 
 
अनुवाद
शल्य बोले, "हे राजन! आपका कल्याण हो। आप अपने नगर को जाएँ। मैं शीघ्र ही लौटूँगा।" यह कहकर राजा शल्य और दुर्योधन ने एक-दूसरे को गले लगाया और चले गए।
 
Shalya said, "O Lord of kings! May you be blessed. Go to your city. I will return soon." Saying this, King Shalya and Duryodhan hugged each other and left.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)