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mahabharat 5.8.21: नरेश्वर! मैं युधिष्ठिर से मिलकर शीघ्र ही लौट आऊँगा। पाण्डुश्रेष्ठ युधिष्ठिर से मिलना भी अत्यन्त आवश्यक है। 21॥   |   mahabharat अध्याय 5.8: शल्यका दुर्योधनके सत्कारसे प्रसन्न हो उसे वर देना और युधिष्ठिरसे मिलकर उन्हें आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 8: शल्यका दुर्योधनके सत्कारसे प्रसन्न हो उसे वर देना और युधिष्ठिरसे मिलकर उन्हें आश्वासन देना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.8.21 
दृष्ट्वा युधिष्ठिरं राजन् क्षिप्रमेष्ये नराधिप।
अवश्यं चापि द्रष्टव्य: पाण्डव: पुरुषर्षभ:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! मैं युधिष्ठिर से मिलकर शीघ्र ही लौट आऊँगा। पाण्डुश्रेष्ठ युधिष्ठिर से मिलना भी अत्यन्त आवश्यक है। 21॥
 
Nareshwar! I will meet Yudhishthira and return soon. It is also very important to meet Pandu's best man Yudhishthira. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)