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mahabharat 5.8.19: वैशम्पायनजी कहते हैं - हे राजन! उस समय शल्य ने दुर्योधन से कहा - 'मैंने आपकी प्रार्थना स्वीकार कर ली है। अब मैं और क्या करूँ?' यह सुनकर गांधारीपुत्र दुर्योधन ने बार-बार कहा कि आपने मेरा सब कार्य पूर्ण कर दिया है॥ 19॥   |   mahabharat अध्याय 5.8: शल्यका दुर्योधनके सत्कारसे प्रसन्न हो उसे वर देना और युधिष्ठिरसे मिलकर उन्हें आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 8: शल्यका दुर्योधनके सत्कारसे प्रसन्न हो उसे वर देना और युधिष्ठिरसे मिलकर उन्हें आश्वासन देना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.8.19 
वैशम्पायन उवाच
कृतमित्यब्रवीच्छल्य: किमन्यत् क्रियतामिति।
कृतमित्येव गान्धारि: प्रत्युवाच पुन: पुन:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - हे राजन! उस समय शल्य ने दुर्योधन से कहा - 'मैंने आपकी प्रार्थना स्वीकार कर ली है। अब मैं और क्या करूँ?' यह सुनकर गांधारीपुत्र दुर्योधन ने बार-बार कहा कि आपने मेरा सब कार्य पूर्ण कर दिया है॥ 19॥
 
Vaishmpayana says - O King! At that time Shalya said to Duryodhan - 'I have accepted your request. Now what else should I do?' On hearing this, Gandhari's son Duryodhan repeatedly said that you have completed all my work.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)