Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.8.17: उसे देखकर और यह जानकर कि उसने यह सब तैयारियां कर ली हैं, मद्रराज ने प्रसन्नतापूर्वक दुर्योधन को गले लगा लिया और कहा, 'तुम्हारी जो इच्छा हो, वह मुझसे मांग लो।'   |   mahabharat अध्याय 5.8: शल्यका दुर्योधनके सत्कारसे प्रसन्न हो उसे वर देना और युधिष्ठिरसे मिलकर उन्हें आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 8: शल्यका दुर्योधनके सत्कारसे प्रसन्न हो उसे वर देना और युधिष्ठिरसे मिलकर उन्हें आश्वासन देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.8.17 
तं दृष्ट्वा मद्रराजश्च ज्ञात्वा यत्नं च तस्य तम्।
परिष्वज्याब्रवीत् प्रीत इष्टोऽर्थो गृह्यतामिति॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उसे देखकर और यह जानकर कि उसने यह सब तैयारियां कर ली हैं, मद्रराज ने प्रसन्नतापूर्वक दुर्योधन को गले लगा लिया और कहा, 'तुम्हारी जो इच्छा हो, वह मुझसे मांग लो।'
 
Seeing him and knowing that he had made all these preparations, the Madra king happily embraced Duryodhana and said, 'Ask me for whatever you desire.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)