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mahabharat 5.8.16: जब राजा शल्य हर्ष से भरकर (अपने ऊपर किए गए उपकार के बदले में) अपने प्राण त्यागने को तैयार हुए, तब दुर्योधन, जो गुप्त रूप से वहाँ छिपा हुआ था, अपने चाचा शल्य के समक्ष गया।   |   mahabharat अध्याय 5.8: शल्यका दुर्योधनके सत्कारसे प्रसन्न हो उसे वर देना और युधिष्ठिरसे मिलकर उन्हें आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 8: शल्यका दुर्योधनके सत्कारसे प्रसन्न हो उसे वर देना और युधिष्ठिरसे मिलकर उन्हें आश्वासन देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.8.16 
सम्प्रहृष्टो यदा शल्यो दिदित्सुरपि जीवितम्।
गूढो दुर्योधनस्तत्र दर्शयामास मातुलम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जब राजा शल्य हर्ष से भरकर (अपने ऊपर किए गए उपकार के बदले में) अपने प्राण त्यागने को तैयार हुए, तब दुर्योधन, जो गुप्त रूप से वहाँ छिपा हुआ था, अपने चाचा शल्य के समक्ष गया।
 
When King Shalya, filled with joy, was ready to sacrifice his life (in return for the favor done to him), then Duryodhana, who was secretly hiding there, went before his uncle Shalya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)