Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.8.15: मैं अपनी प्रसन्नता के अनुसार उन सबको कुछ न कुछ पुरस्कार अवश्य दूँगा। कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर को भी मेरे इस आचरण का अनुमोदन करना होगा। यह सुनकर सभी सेवक आश्चर्यचकित हो गए और उन्होंने दुर्योधन से ये सब बातें कहीं ॥15॥ | mahabharat अध्याय 5.8: शल्यका दुर्योधनके सत्कारसे प्रसन्न हो उसे वर देना और युधिष्ठिरसे मिलकर उन्हें आश्वासन देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं अपनी प्रसन्नता के अनुसार उन सबको कुछ न कुछ पुरस्कार अवश्य दूँगा। कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर को भी मेरे इस आचरण का अनुमोदन करना होगा। यह सुनकर सभी सेवक आश्चर्यचकित हो गए और उन्होंने दुर्योधन से ये सब बातें कहीं ॥15॥
"I shall give all of them some reward as a result of my pleasure. Yudhishthira, the son of Kunti, must also approve of my behaviour." On hearing this, all the servants were astonished and told all these things to Duryodhan. ॥15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥