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mahabharat 5.79.3-4h: जिस खेत में जुताई और सिंचाई हो चुकी है, वहाँ यह प्रयास किया गया है; परन्तु यह अवश्य देखा गया है कि वहाँ प्रारब्ध के कारण सूखा पड़ा है। [अतः प्रयास की सफलता के लिए प्रारब्ध का अनुकूल होना आवश्यक है।]   |   mahabharat अध्याय 5.79: श्रीकृष्णका अर्जुनको उत्तर देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 79: श्रीकृष्णका अर्जुनको उत्तर देना  »  श्लोक 3-4h
 
 
श्लोक  5.79.3-4h 
तत्र वै पौरुषं ब्रूयुरासेकं यत्र कारितम्॥ ३॥
तत्र चापि ध्रुवं पश्येच्छोषणं दैवकारितम्।
 
 
अनुवाद
जिस खेत में जुताई और सिंचाई हो चुकी है, वहाँ यह प्रयास किया गया है; परन्तु यह अवश्य देखा गया है कि वहाँ प्रारब्ध के कारण सूखा पड़ा है। [अतः प्रयास की सफलता के लिए प्रारब्ध का अनुकूल होना आवश्यक है।]
 
In the field where ploughing and irrigation has been done, this effort has been made; but it is definitely seen that there is drought due to destiny. [Therefore, for the success of effort, the favourable nature of destiny is necessary.]
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)