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mahabharat 5.79.17: हे कुन्तीपुत्र! आप देवताओं के दिव्य नियम (पृथ्वी का भार कम करने के लिए) को भली-भाँति जानते हैं। फिर शत्रुओं के साथ संधि कैसे की जा सकती है?॥ 17॥   |   mahabharat अध्याय 5.79: श्रीकृष्णका अर्जुनको उत्तर देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 79: श्रीकृष्णका अर्जुनको उत्तर देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.79.17 
यच्चापि परमं दिव्यं तच्चाप्यनुगतं त्वया।
विधानं विहितं पार्थ कथं शर्म भवेत् परै:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! आप देवताओं के दिव्य नियम (पृथ्वी का भार कम करने के लिए) को भली-भाँति जानते हैं। फिर शत्रुओं के साथ संधि कैसे की जा सकती है?॥ 17॥
 
O son of Kunti! You are fully aware of the divine rule of the gods (for reducing the burden of the earth). Then how can a treaty be made with the enemies?॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)