vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 79: श्रीकृष्णका अर्जुनको उत्तर देना
»
श्लोक 15
श्लोक
5.79.15
जानासि हि महाबाहो त्वमप्यस्य परं मतम्।
प्रियं चिकीर्षमाणं च धर्मराजस्य मामपि॥ १५॥
अनुवाद
हे महाबाहो! आप जानते हैं कि दुर्योधन भी मेरे विषय में यही विचार रखता है कि मैं धर्मराज युधिष्ठिर को प्रसन्न करना चाहता हूँ ॥15॥
O mighty-armed one! You know that even Duryodhan has the same opinion about me that I want to please Dharmaraja Yudhishthira. ॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×