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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 79: श्रीकृष्णका अर्जुनको उत्तर देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.79.14 
असकृच्चाप्यहं तेन त्वत्कृते पार्थ भेदित:।
न मया तद् गृहीतं च पापं तस्य चिकीर्षितम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! उसने मुझे तुमसे अलग करने का अनेक बार प्रयत्न किया है; किन्तु मैंने कभी भी उसके पापपूर्ण प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
 
O son of Kunti! He has tried many times to separate me from you; but I have never accepted his sinful proposal.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)