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mahabharat 5.79.12-13: भारत! जिसने तुम्हें बचपन में ही नाना प्रकार के कष्ट दिए हैं, जो दुष्ट और क्रूर पुरुष तुम्हारे राज्य का हड़प चुका है तथा जो पापी दुर्योधन युधिष्ठिर के धन को देखकर भी शांत नहीं रह सकता, वह मेरे और समस्त संसार के द्वारा मारा जाएगा॥ 12-13॥   |   mahabharat अध्याय 5.79: श्रीकृष्णका अर्जुनको उत्तर देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 79: श्रीकृष्णका अर्जुनको उत्तर देना  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  5.79.12-13 
मम चापि स वध्यो हि जगतश्चापि भारत।
येन कौमारके यूयं सर्वे विप्रकृता: सदा॥ १२॥
विप्रलुप्तं च वो राज्यं नृशंसेन दुरात्मना।
न चोपशाम्यते पाप: श्रियं दृष्ट्वा युधिष्ठिरे॥ १३॥
 
 
अनुवाद
भारत! जिसने तुम्हें बचपन में ही नाना प्रकार के कष्ट दिए हैं, जो दुष्ट और क्रूर पुरुष तुम्हारे राज्य का हड़प चुका है तथा जो पापी दुर्योधन युधिष्ठिर के धन को देखकर भी शांत नहीं रह सकता, वह मेरे और समस्त संसार के द्वारा मारा जाएगा॥ 12-13॥
 
Bhaarat! The one who has always given you all various troubles even in your childhood, the wicked and cruel person who has usurped your kingdom and the sinful Duryodhan who cannot remain calm on seeing the wealth of Yudhishthira, is to be killed by me and the entire world.॥ 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)