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श्लोक 5.78.3  |
अफलं मन्यसे वापि पुरुषस्य पराक्रमम्।
न चान्तरेण कर्माणि पौरुषेण फलोदय:॥ ३॥ |
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| अनुवाद |
| अथवा क्या तुम मनुष्य के पराक्रम को व्यर्थ समझते हो; क्योंकि पूर्वजन्म के कर्मों (भाग्य) के बिना केवल प्रयत्न का कोई फल नहीं मिलता॥3॥ |
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| Or do you consider man's prowess to be futile; because without the deeds (destiny) of the previous life, mere effort does not yield any result.॥ 3॥ |
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