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mahabharat 5.78.15: श्री कृष्ण! आप अपने मित्रों के कल्याण के लिए जो कुछ करना चाहते हैं, वह आपके लिए आश्चर्य की बात नहीं है। चाहे वह सौम्य हो या कठोर, आपको किसी भी प्रकार से अपने मुख्य कार्य को सफल बनाना चाहिए। ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 5.78: अर्जुनका कथन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 78: अर्जुनका कथन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.78.15 
न चैतदद्‍भुतं कृष्ण मित्रार्थे यच्चिकीर्षसि।
क्रिया कथं च मुख्या स्यान्मृदुना चेतरेण वा॥ १५॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! आप अपने मित्रों के कल्याण के लिए जो कुछ करना चाहते हैं, वह आपके लिए आश्चर्य की बात नहीं है। चाहे वह सौम्य हो या कठोर, आपको किसी भी प्रकार से अपने मुख्य कार्य को सफल बनाना चाहिए। ॥15॥
 
Sri Krishna! Whatever you want to do for the welfare of your friends is not surprising for you. Be it mild or harsh, you should somehow make your main task successful by whatever means possible. ॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)