सुमन्त्रितं सुनीतं च न्यायतश्चोपपादितम्।
कृतं मानुष्यकं कर्म दैवेनापि विरुध्यते॥ ८॥
अनुवाद
जो मनुष्य कार्य भली-भाँति सोच-विचारकर, उत्तम सिद्धांतों से युक्त और न्यायपूर्वक किए जाते हैं, वे भी कभी-कभी भाग्य के कारण बाधित हो जाते हैं - उनकी सिद्धि में बाधा पड़ती है ॥8॥
Even human tasks that are well thought out, accompanied by good principles and executed with justice, sometimes get obstructed by destiny - their accomplishment is hindered. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥