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mahabharat 5.77.7: दोषदर्शी विद्वानों द्वारा जो कर्म भिन्न रूप में देखे या माने जाते हैं, वे वायु के वेग की तरह बदल जाते हैं और किसी अन्य रूप में परिणत हो जाते हैं ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 5.77: श्रीकृष्णका भीमसेनको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 77: श्रीकृष्णका भीमसेनको आश्वासन देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.77.7 
अन्यथा परिदृष्टानि कविभिर्दोषदर्शिभि:।
अन्यथा परिवर्तन्ते वेगा इव नभस्वत:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
दोषदर्शी विद्वानों द्वारा जो कर्म भिन्न रूप में देखे या माने जाते हैं, वे वायु के वेग की तरह बदल जाते हैं और किसी अन्य रूप में परिणत हो जाते हैं ॥7॥
 
The deeds which are seen or considered in a different form by fault-finding scholars change like the velocity of the wind and get transformed into some other form. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)