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mahabharat 5.77.20: वृकोदर! इसीलिए जब तुम अपने कायरतापूर्ण वचनों से शांति का प्रस्ताव करने लगे, तब मुझे संदेह हुआ कि युद्ध के सम्बन्ध में तुम्हारे विचार बदल गये हैं, जिसके कारण मैंने उपर्युक्त वचन कहकर तुम्हारा तेज जगाया था।   |   mahabharat अध्याय 5.77: श्रीकृष्णका भीमसेनको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 77: श्रीकृष्णका भीमसेनको आश्वासन देना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.77.20 
तस्मादाशङ्कमानोऽहं वृकोदर मतिं तव।
गदत: क्लीबया वाचा तेजस्ते समदीदिपम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वृकोदर! इसीलिए जब तुम अपने कायरतापूर्ण वचनों से शांति का प्रस्ताव करने लगे, तब मुझे संदेह हुआ कि युद्ध के सम्बन्ध में तुम्हारे विचार बदल गये हैं, जिसके कारण मैंने उपर्युक्त वचन कहकर तुम्हारा तेज जगाया था।
 
Vrikodara! That is why when you started proposing peace with your cowardly words, I suspected that your thoughts regarding the war had changed, due to which I aroused your brilliance by saying the above mentioned words.
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि कृष्णवाक्ये सप्तसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें श्रीकृष्णवाक्यविषयक सतहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)