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mahabharat 5.77.2: मैं आपकी महानता जानता हूँ। मैं आपके बल और पराक्रम से भी परिचित हूँ। आपके द्वारा किए गए महान कार्य भी मुझसे छिपे नहीं हैं। इसलिए मैं आपका तिरस्कार नहीं करता॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 5.77: श्रीकृष्णका भीमसेनको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 77: श्रीकृष्णका भीमसेनको आश्वासन देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.77.2 
वेदाहं तव माहात्म्यमुत ते वेद यद् बलम्।
उत ते वेद कर्माणि न त्वां परिभवाम्यहम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
मैं आपकी महानता जानता हूँ। मैं आपके बल और पराक्रम से भी परिचित हूँ। आपके द्वारा किए गए महान कार्य भी मुझसे छिपे नहीं हैं। इसलिए मैं आपका तिरस्कार नहीं करता॥ 2॥
 
I know your greatness. I am also aware of your strength and valour. The great feats you have performed are also not hidden from me. Therefore, I do not despise you.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)