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mahabharat 5.77.17: यदि कौरव युद्ध पर अड़े रहें और मेरे युद्धविराम के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दें, तो यहाँ अवश्य ही युद्ध होगा, जो कि भयंकर कर्म है ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 5.77: श्रीकृष्णका भीमसेनको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 77: श्रीकृष्णका भीमसेनको आश्वासन देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.77.17 
ते चेदभिनिवेक्ष्यन्ते नाभ्युपैष्यन्ति मे वच:।
कुरवो युद्धमेवात्र घोरं कर्म भविष्यति॥ १७॥
 
 
अनुवाद
यदि कौरव युद्ध पर अड़े रहें और मेरे युद्धविराम के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दें, तो यहाँ अवश्य ही युद्ध होगा, जो कि भयंकर कर्म है ॥17॥
 
If the Kauravas insist on war and reject my proposal for a truce, then war will certainly take place here, which is a dreadful deed. ॥17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)