श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 77: श्रीकृष्णका भीमसेनको आश्वासन देना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.77.15 
श्वोभूते धृतराष्ट्रस्य समीपं प्राप्य पाण्डव।
यतिष्ये प्रशमं कर्तुं युष्मदर्थमहापयन्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे पाण्डुपुत्र! कल प्रातःकाल मैं राजा धृतराष्ट्र के पास जाऊँगा और आपके स्वार्थ की पूर्ति में किसी प्रकार की बाधा पहुँचाए बिना दोनों पक्षों के बीच संधि कराने का प्रयत्न करूँगा॥15॥
 
O son of Pandu! Tomorrow morning I will go to King Dhritarashtra and try to conclude a treaty between the two parties without causing any hindrance to the fulfillment of your selfish interests. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)