हे पाण्डुपुत्र! कल प्रातःकाल मैं राजा धृतराष्ट्र के पास जाऊँगा और आपके स्वार्थ की पूर्ति में किसी प्रकार की बाधा पहुँचाए बिना दोनों पक्षों के बीच संधि कराने का प्रयत्न करूँगा॥15॥
O son of Pandu! Tomorrow morning I will go to King Dhritarashtra and try to conclude a treaty between the two parties without causing any hindrance to the fulfillment of your selfish interests. ॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥