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mahabharat 5.76.3-4h: या यह भी हो सकता है कि जिस प्रकार नाव के बिना गहरे सरोवर में तैरता हुआ मनुष्य उसकी गहराई नहीं जान सकता, उसी प्रकार आप मुझे ठीक से नहीं जानते। इसीलिए आप मुझ पर अनुचित शब्दों का आरोप लगा रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.76: भीमसेनका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका उत्तर  »  श्लोक 3-4h
 
 
श्लोक  5.76.3-4h 
उत वा मां न जानासि प्लवन् ह्रद इवाप्लवे॥ ३॥
तस्मादनभिरूपाभिर्वाग्भिर्मां त्वं समर्च्छसि।
 
 
अनुवाद
या यह भी हो सकता है कि जिस प्रकार नाव के बिना गहरे सरोवर में तैरता हुआ मनुष्य उसकी गहराई नहीं जान सकता, उसी प्रकार आप मुझे ठीक से नहीं जानते। इसीलिए आप मुझ पर अनुचित शब्दों का आरोप लगा रहे हैं।
 
Or it is also possible that just as a man swimming in a deep lake without a boat cannot know its depth, similarly you do not know me well. That is why you are accusing me with inappropriate words. 3 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)