श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका उत्तर  »  श्लोक 2-3h
 
 
श्लोक  5.76.2-3h 
भीमसेन उवाच
अन्यथा मां चिकीर्षन्तमन्यथा मन्यसेऽच्युत।
प्रणीतभावमत्यर्थं युधि सत्यपराक्रमम्॥ २॥
वेत्सि दाशार्ह सत्यं मे दीर्घकालं सहोषित:।
 
 
अनुवाद
भीमसेन बोले- अच्युत! मैं तो कुछ और ही करना चाहता हूँ, परन्तु तुम कुछ और ही सोच रहे हो। हे दशार्हनन्दन! तुम बहुत समय से मेरे साथ हो। अतः तुम्हें मेरे विषय में यह सत्य जानकारी अवश्य होगी कि मुझे युद्ध में बड़ा प्रेम है और मेरा पराक्रम भी मिथ्या नहीं है।॥ 2 1/2॥
 
Bhimsena said- Achyuta! I want to do something else, but you are thinking something else. O son of Dasharhanandan! You have been with me for a long time. Therefore, you must have the true information about me that I have great love for war and my valour is also not false.॥ 2 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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