मया प्रणुन्नान् मातङ्गान् रथिन: सादिनस्तथा।
तथा नरानभिक्रुद्धं निघ्नन्तं क्षत्रियर्षभान्॥ १६॥
द्रष्टा मां त्वं च लोकश्च विकर्षन्तं वरान् वरान्।
अनुवाद
जब मैं घोर युद्ध में क्रोध में भरकर उन्मत्त हाथियों, सारथि और घुड़सवारों को मारकर गिरा दूँगा और अन्य श्रेष्ठ क्षत्रिय योद्धाओं को भी मार डालूँगा, तब तुम और अन्य लोग भी मुझे श्रेष्ठ योद्धाओं को चुन-चुनकर मारते हुए देखोगे॥16 1/2॥
When in a fierce battle I, in a fit of rage, begin to strike down and throw down the mad elephants, charioteers and horse-riders and also begin to kill other great Kshatriya warriors, then you and others will also see me selectively killing the foremost warriors.॥ 16 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥