श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका उत्तर  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  5.76.12-13h 
न हि त्वं नाभिजानासि मम विक्रममच्युत॥ १२॥
यथा मया विनिर्जित्य राजानो वशगा: कृता:।
 
 
अनुवाद
हे अच्युत! युद्धों में राजाओं को जीतकर उन्हें वश में करने में मेरी जो शक्ति है, उससे तुम अनभिज्ञ नहीं हो। ॥12 1/2॥
 
Achyuta! You are not unaware of my prowess in conquering kings in wars and subjugating them. ॥ 12 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)