श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 75: श्रीकृष्णका भीमसेनको उत्तेजित करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.75.10 
अकस्मात् स्मयमानश्च रहस्यास्से रुदन्निव।
जान्वोर्मूर्धानमाधाय चिरमास्से प्रमीलित:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
कभी वह अचानक हँसने लगता, कभी किसी एकान्त स्थान में रोता हुआ प्रतीत होता, और कभी घुटनों पर सिर रखकर और आँखें बंद करके बहुत देर तक बैठा रहता॥10॥
 
Sometimes he would suddenly burst into laughter, sometimes he would seem to be crying in a secluded place, and sometimes he would sit with his head on his knees and eyes closed for a long time.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)