Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.74.4: वह अदूरदर्शी, क्रूर वचन बोलने वाला, दूसरों की निन्दा करने वाला, क्रूर और वीर, दीर्घकाल तक क्रोध करने वाला, शिक्षा देने या सन्मार्ग पर ले जाने की क्षमता से रहित, पापी और छल-कपट से प्रेम करने वाला होता है ॥4॥ | mahabharat अध्याय 5.74: भीमसेनका शान्तिविषयक प्रस्ताव । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह अदूरदर्शी, क्रूर वचन बोलने वाला, दूसरों की निन्दा करने वाला, क्रूर और वीर, दीर्घकाल तक क्रोध करने वाला, शिक्षा देने या सन्मार्ग पर ले जाने की क्षमता से रहित, पापी और छल-कपट से प्रेम करने वाला होता है ॥4॥
He is short-sighted, speaks cruelly, slanders others, is cruel and brave, harbors anger for a long time, is devoid of the ability to teach or lead to the right path, is a sinful person and loves deceit. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥