श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 74: भीमसेनका शान्तिविषयक प्रस्ताव  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.74.21 
अप्युदासीनवृत्ति: स्याद् यथा न: कुरुभि: सह।
वासुदेव तथा कार्यं न कुरूननय: स्पृशेत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वासुदेव! आपको कौरवों के प्रति हमारी तटस्थता और उदासीनता बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। कौरवों को किसी भी प्रकार से अन्याय का स्पर्श नहीं होना चाहिए।॥21॥
 
Vasudev! You should try to maintain our neutrality and indifference towards the Kauravas. The Kauravas should not be touched by injustice in any way. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)