श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 74: भीमसेनका शान्तिविषयक प्रस्ताव  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.74.2 
अमर्षी जातसंरम्भ: श्रेयोद्वेषी महामना:।
नोग्रं दुर्योधनो वाच्य: साम्नैवैनं समाचरे:॥ २॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन असहिष्णु, क्रोधी, कल्याण-विरोधी और महान् महत्त्वाकांक्षी है। अतः उससे कटु वचन न कहो, कूटनीति से उसे समझाने का प्रयत्न करो॥ 2॥
 
Duryodhan is intolerant, full of anger, opposed to welfare and has great ambitions. Therefore, do not say harsh things to him, try to convince him through diplomatic means.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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