Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.74.19: अतः हे भयंकर और पराक्रमी श्रीकृष्ण! उनसे जो कुछ भी कहो, उसे धीरे-धीरे, कोमल और मधुर वाणी में कहो। तुम्हारा कथन धर्म और अर्थ से युक्त तथा कल्याणकारी हो। उसमें किसी प्रकार की उग्रता न हो। साथ ही, यह भी ध्यान रखो कि तुम्हारे अधिकांश वचन उनके हित के अनुरूप हों।॥19॥ | mahabharat अध्याय 5.74: भीमसेनका शान्तिविषयक प्रस्ताव । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अतः हे भयंकर और पराक्रमी श्रीकृष्ण! उनसे जो कुछ भी कहो, उसे धीरे-धीरे, कोमल और मधुर वाणी में कहो। तुम्हारा कथन धर्म और अर्थ से युक्त तथा कल्याणकारी हो। उसमें किसी प्रकार की उग्रता न हो। साथ ही, यह भी ध्यान रखो कि तुम्हारे अधिकांश वचन उनके हित के अनुरूप हों।॥19॥
Therefore, O fearsome and valiant Sri Krishna! Whatever you say to him, say it slowly in a soft and sweet voice. Your statement should be full of Dharma and meaning and should be beneficial. There should not be any kind of aggressiveness in it. Also, keep in mind that most of your words should be in accordance with his interest.॥19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥