श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 73: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको युद्धके लिये प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  5.73.36 
यात्वा चाहं कुरून् सर्वान् युष्मदर्थमहापयन्।
यतिष्ये प्रशमं कर्तुं लक्षयिष्ये च चेष्टितम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पहुँचकर मैं तुम्हारे स्वार्थ में किंचितमात्र भी बाधा न आने देकर समस्त कौरवों के साथ संधि करने का प्रयत्न करूँगा और उनके प्रयत्नों पर दृष्टि रखूँगा॥ 36॥
 
Upon reaching there, without allowing even the slightest flaw to come in the way of your self-interest, I shall endeavor to conclude a treaty with all the Kauravas and shall keep an eye on their efforts.॥ 36॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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