श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 73: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको युद्धके लिये प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  5.73.35 
तस्मिँल्लोकपरित्यक्ते किं कार्यमवशिष्यते।
हते दुर्योधने राजन् यदन्यत् क्रियतामिति॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन को अन्यायी समझकर सब लोग त्याग देंगे और निन्दनीय होने के कारण उसका विनाश हो जाएगा। ऐसी स्थिति में तुम्हारा और कौन-सा कार्य शेष रह गया है?॥ 35॥
 
Everyone will abandon Duryodhan considering him unjust and he will be destroyed because he is condemnable. In that case what other task of yours remains to be accomplished?॥ 35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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