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mahabharat 5.73.28: हे निष्पाप राजन! तुम जिस प्रकार अपने पिता के समान धृतराष्ट्र और भीष्म के प्रति प्रणाम और नम्रतापूर्वक व्यवहार करते हो, वह सर्वथा तुम्हारे योग्य है। मुझे भी वह प्रिय है॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 5.73: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको युद्धके लिये प्रोत्साहन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 73: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको युद्धके लिये प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.73.28 
सर्वथा त्वत्क्षमं चैतद् रोचते च ममानघ।
यत् त्वं पितरि भीष्मे च प्रणिपातं समाचरे:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे निष्पाप राजन! तुम जिस प्रकार अपने पिता के समान धृतराष्ट्र और भीष्म के प्रति प्रणाम और नम्रतापूर्वक व्यवहार करते हो, वह सर्वथा तुम्हारे योग्य है। मुझे भी वह प्रिय है॥ 28॥
 
O innocent king! The way you bow down and behave humbly towards Dhritarashtra and Bhishma, who are like your fathers, is completely worthy of you. I also like it.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)