Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.73.10: हे पाण्डुपुत्र! कौरवों द्वारा संधि न करने का सबसे बड़ा कारण या प्रमाण यही है कि आपको लंगोटी पहनाकर तथा इतने लम्बे समय तक वनवास का कष्ट सहने के बाद भी आपने कभी पश्चाताप नहीं किया॥10॥   |   mahabharat अध्याय 5.73: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको युद्धके लिये प्रोत्साहन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 73: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको युद्धके लिये प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.73.10 
एतदेव निमित्तं ते पाण्डवास्तु यथा त्वयि।
नान्वतप्यन्त कौपीनं तावत् कृत्वापि दुष्करम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे पाण्डुपुत्र! कौरवों द्वारा संधि न करने का सबसे बड़ा कारण या प्रमाण यही है कि आपको लंगोटी पहनाकर तथा इतने लम्बे समय तक वनवास का कष्ट सहने के बाद भी आपने कभी पश्चाताप नहीं किया॥10॥
 
O son of Pandu! The biggest reason or proof of the Kauravas not entering into a treaty is that even after making you wear a loincloth and subjecting you to the arduous pain of exile for such a long time, you never repented for it.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)