श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 73: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको युद्धके लिये प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.73.1 
श्रीभगवानुवाच
संजयस्य श्रुतं वाक्यं भवतश्च श्रुतं मया।
सर्वं जानाम्यभिप्रायं तेषां च भवतश्च य:॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री भगवान बोले - हे राजन! मैंने संजय की बातें सुनी हैं और आपकी भी। मैं जानता हूँ कि कौरव क्या चाहते हैं और मैं आपके विचारों से भी अनभिज्ञ नहीं हूँ॥ 1॥
 
Sri Bhagavan said - O King! I have heard Sanjaya's words as well as yours. I know what the Kauravas want and I am not unaware of your thoughts either.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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