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mahabharat 5.72.d1-d2: वैशम्पायन कहते हैं- भरत! संजय के चले जाने पर धर्मराज युधिष्ठिर ने भीमसेन, अर्जुन, माद्रीकुमार नकुल-सहदेव, विराट, द्रुपद तथा केकय देश के महान योद्धाओं के पास जाकर कहा- 'हमें शंख, चक्र तथा गदाधारी भगवान श्रीकृष्ण के पास जाकर उनसे कौरव सभा में चलने का अनुरोध करना चाहिए।'   |   mahabharat अध्याय 5.72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.72.d1-d2 
वैशम्पायन उवाच
संजये प्रतियाते तु धर्मराजो युधिष्ठिर:।
(अर्जुनं भीमसेनं च माद्रीपुत्रौ च भारत।
विराटद्रुपदौ चैव केकयानां महारथान्॥
अब्रवीदुपसङ्गम्य शङ्खचक्रगदाधरम्॥
अभियाचामहे गत्वा प्रयातुं कुरुसंसदम्।
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं- भरत! संजय के चले जाने पर धर्मराज युधिष्ठिर ने भीमसेन, अर्जुन, माद्रीकुमार नकुल-सहदेव, विराट, द्रुपद तथा केकय देश के महान योद्धाओं के पास जाकर कहा- 'हमें शंख, चक्र तथा गदाधारी भगवान श्रीकृष्ण के पास जाकर उनसे कौरव सभा में चलने का अनुरोध करना चाहिए।'
 
Vaishampayana says - Bharat! After Sanjaya left, Dharmaraja Yudhishthira went to Bhimsen, Arjun, Madrikumar Nakul-Sahdev, Virat, Drupada and the great warriors of Kekaya country and said - 'We should go to Lord Krishna who holds conch, discus and mace and request him to go to the Kaurava Sabha.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)