श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  5.72.93 
यद् यद् धर्मेण संयुक्तमुपपद्येद्धितं वच:।
तत् तत् केशव भाषेथा: सान्त्वं वा यदि वेतरत्॥ ९३॥
 
 
अनुवाद
केशव! जो भी बात उचित, युक्तिसंगत और हितकर हो, चाहे वह कोमल हो या कठोर, उसे अवश्य कहिए ॥93॥
 
Keshav! Whatever is righteous, reasonable and beneficial, be it mild or harsh, you must say it. ॥93॥
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि युधिष्ठिरकृतकृष्णप्रेरणे द्विसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णको प्रेरणाविषयक बहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७२॥

[दाक्षिणात्य अधिक पाठके ५ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ९८ १/२ श्लोक हैं।]
 
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd